परमपिता की हम स्तुति गायें

वो ही है जो बचाता हमें
सारे पापों को करता क्षमा
सारे रोगों को करता चंगा
धन्यवाद दे उसके आसनों में
आनंद से आयें उसके चरणों में
संगीत गाकर खुशी से
मुक्ति की चट्टान को जय ललकारें
परमपिता की…
वो ही हमारा है परम पिता
तरस खाता है सर्व सदा
पूरब से पश्चिम है जितनी दूर
उतनी ही दूर किये हमारे गुनाह
परमपिता की…
माँ की तरह उसने दी तसल्ली
दुनिया के खतरों में छोड़ा नहीं
खालिस दूध है कलाम का दिया
और दी हमेशा की जघ्न्दिगी
परमपिता की…
चरवाहे की मानिंद ढूंढा उसने
पापों की कीच से निकाला हमें
हमको बचाने को जान अपनी दी
ताकि हाथ में हम उसके रहें
परमपिता की…
घोंसले को बार बार तोड़कर उसने
चाहा की सीखें हम उड़ना उससे
परों पर उठाया उकाब की तरह
ताकि हमको चोट ना लगे
परमपिता…

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